चाणक्य की नीति और चीन-पाकिस्तान की दोस्ती का अंत
आचार्य चाणक्य की मानें तो दुष्ट व्यक्ति से मित्रता करने से बेहतर है कि दुश्मन से ही दोस्ती कर ली जाए. चीन इस नीति को नहीं समझ पाया और पाकिस्तान के साथ गहरी दोस्ती का रास्ता चुन लिया. नतीजा वही हुआ, जो चाणक्य ने पहले ही बता दिया था. ‘सदाबहार दोस्त’ कहलवाने वाले पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने चीन के साथ धोखा किया और डोनाल्ड ट्रंप की डिनर टेबल पर पहुंच गए. अब जब चीन को इस धोखे का अहसास हुआ, तो वह पाकिस्तान से अपने रिश्ते समेटने लगा.
Nikkei Asia की रिपोर्ट: चीनी कंपनियां पाकिस्तान से निकलने को तैयार
Nikkei Asia की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के उन प्रोजेक्ट्स में जहां चीनी कंपनियां बेरोकटोक निवेश कर रही थीं, अब वे सावधानी बरत रही हैं. कई कंपनियां वहां से निकलने के रास्ते तलाश रही हैं और कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स तो बंद भी हो चुके हैं. चीन अब सवाल कर रहा है कि उसका पैसा कहां फंसा है और उसका रिटर्न कहां है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पावर चाइना की एक सहायक कंपनी पहले पाकिस्तान की बड़ी बिजली वितरण कंपनी—फैसलाबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी (FESCO) को खरीदने की योजना बना रही थी. लगभग सभी बातें तय हो चुकी थीं, लेकिन अचानक कंपनी ने कदम पीछे खींच लिए. विशेषज्ञों का कहना है कि यह पाकिस्तान में चीन की घटती दिलचस्पी का संकेत है. हालांकि, यह कहानी सिर्फ FESCO तक सीमित नहीं है.
CPEC प्रोजेक्ट्स: चीन का सबसे बड़ा निवेश
चीन ने पाकिस्तान में सड़कों, हाईवे और पोर्ट्स में भारी निवेश किया, लेकिन उसकी सबसे बड़ी रुचि बिजली क्षेत्र में थी. CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) परियोजना के तहत चीन और उसकी कंपनियों ने पाकिस्तान में कई बड़े कोयला, जलविद्युत और पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट्स स्थापित किए. CPEC की सूची में साहीवाल का 1,320 मेगावाट कोयला बिजलीघर, पोर्ट कासिम का 1,320 मेगावाट प्लांट, हब का 1,320 मेगावाट प्लांट, थार के प्रोजेक्ट्स, कोरोट का 720 मेगावाट हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और सुकी किनारी का 884 मेगावाट हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं, जिन्हें चीन ने विकसित किया.